बहन की शादी के कार्ड बांटते मिला था पहला रोल, अब अनंत नाग को मिलेगा दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड
नई दिल्ली: भारतीय सिनेमा के शीर्ष सम्मान 'दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड 2024' के लिए दिग्गज अभिनेता अनंत नाग को चुना गया है। 300 से अधिक फिल्मों में काम कर चुके 78 वर्षीय अनंत नाग का जीवन किसी फिल्मी पटकथा से कम रोमांचक नहीं रहा है।
बचपन में 1962 और 1965 के युद्ध से प्रेरित होकर वे सेना में जाना चाहते थे, लेकिन बाईं आंख की कमजोरी के चलते वायुसेना व सेना में चयन नहीं हो सका। पढ़ाई के सिलसिले में पिता ने उन्हें कर्नाटक से मुंबई भेज दिया।
साल 1967 में वे मुंबई में अपनी बड़ी बहन श्यामला की शादी के कार्ड बांटने निकले थे। रास्ते में कन्नड़ और कोंकणी रंगमंच से जुड़े प्रभाकर मुदूर और व्यंकटराव तालगेरी की नजर उन पर पड़ी। दोनों ने उन्हें बीच रास्ते में रोककर नाटक में अभिनय का प्रस्ताव दे दिया और यहीं से उनके अभिनय का ऐतिहासिक सफर शुरू हुआ।
उनके सफर में कई नाटकीय मोड़ आए। वर्ष 1974 में अपनी तीसरी फिल्म 'हंसगीते' की शूटिंग के लिए मुंबई से बेंगलुरु जाते समय ट्रेन में उन्हें गंभीर टाइफाइड हुआ और वे बेहोश हो गए। तब वे ज्यादा लोकप्रिय नहीं थे। ट्रेन में मौजूद डॉ. देवदत्त ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया, 15 दिन अपने घर रखकर देखभाल की और बाद में उनकी फिल्म देखकर उनके प्रशंसक बन गए। पिता सदानंद द्वारा बचपन में सिखाए गए गीता के श्लोकों और कड़े अनुशासन ने उन्हें ताउम्र जमीन से जोड़े रखा।